Saturday, 8 February 2020

कुछ नये चुटकुले

इस दुनियामें एक पानवालाही सच्चा इनसान है जो पूछकर चूना लगाता है ।

नजरका ऑपरेशन तो पॉसिबल है, मगर नजरियेका नही ।

हम इंडियन्सके पास हर प्रॉब्लेम का सोल्यूशन है, बस प्रॉब्लेम अपना नही होना चाहिये ।

मोटापा सबसे वफादार है, एक बार आ गया तो जिंदगीभर साथ निभाता है ।

लडकियाँ सिर्फ किचनमे अच्छी लगती हैं और ऐसी सोच रखनेवाले कबरमें।

लोग हमारे बारेमें क्या सोचते है यह भी हम ही सोचेंगे तो लोग क्या सोचेंगे ?

एक चीज जो कभी लडकियोंकी नही होती .... गलती

पता नही लोगोंको सच्चा प्यार कैसे मिल जाता है, मुझ तो सेलोटेपका एंडभी नही मिलता ।

डर लगता है उन लोकोंसे जिनके दिलमेंभी दिमाग होता है।

अपनी खूबसूरतीपर घमंड होता है तो अपनी आधार कार्डकी फोटो देख लें।

जिंदगी औरभी अच्छी होती अगर सभी दुखदर्द मेड इन चायना होते ।

जिन्हे लगता है बस अधूरी मोहब्बतही दर्द देती है, कभी धूपमें खडी बाइकपर बैठके देखें।

दस रुपयेकी कीमत वॅलेटमें नही, मोबाइलमें समझ आती है।

पत्नी : पहले मेरा फिगर पेप्सीकी बोटलजैसे था।
पति : वो तो अभी भी है।
पत्नी : सचमें ?
पति : हाँ, पहले ३०० एमएल की बोटल थी, अब दो लिटरकी है।

पानीमें बैठी भैंस और मेक अप करने बैठी लडकी कभी जल्दी उठती नही ।

जो लोग एटीएमसे निकले पैसे गिनते हैं , वो किसीपे ट्रस्ट नही करते ।

३ चीजें किस्मतवालोंकोही मिलती हैं, १-सच्चा प्यार, २- सच्चा दोस्त और ३- अपने कामसे काम रखनेवाले रिश्तेदार ।

किसी चीजको सच्चे दिलसे चाहो तो सारी कायनात तुम्हारी वाट लगानेमें लग जाती है।
 
शादी में दुलहनका एक्स बॉयफ्रेंड आया, लडकीके पिताने पूछा, "आप कौन है?"
उसने कहा , "मैं सेमिफायनलमें बाहर हो गया था, अब फायनल देखने आया हूँ।"

सवाल : अरेंज्ड मॅरेजमें डायव्होर्स कम क्यों होते हैं ?
जवाब  : जो अपनी मरजीसे शादी नही कर पाया वो डायव्होर्स क्या खाक लेगा  ?

अॅलार्म बंद  करनेके बाद जो नींद आती है वो नींद रातमें भी नही आती है।

छोटा बच्चा अपनी माँसे," माँ, मैं इतना बडा कब बन जाऊँगा कि आपसे पूछे बिना हर जगह चला जाऊँ ?"
माँ बहुत प्यारसे, "बेटा, इतना बडा तो तेरा बापभी नही हुवा अबतक। "

अरे इसकी क्या जरूरत थी ? Indian version of Thank you.

Govt. Bus = No      सरकारी बस = नही
Govt. school = No  सरकारी पाठशाला = नही
Govt. Hospital = No सरकारी अस्पताल = नही
Govt. job = Yes        सरकारी नौकरी = हाँ भई हाँ

Elder sibling in other countries : To Help, To Protect, To Love
अन्य देशोंमे बडा भाई : मदद, रक्षा, प्यार के लिये
In India : Paani Lao, Remote Lao, Gate Kholo, Roomka Door Band Karo.
भारत में :पानी लाओ, रिमोट लाओ, गेट खोलो, रूमका दरवाजा बंद करो

Life of a Doctor
- Become a Doctor, - Marry a Doctor - Have kids - Make kids Doctor - Find Doctor Rishta for kids - Die
डॉक्टरका जीवन : डॉक्टर बनो, डॉक्टरसे शादी करो, बच्चे पैदा करो, उनको डॉक्टर बनाओ, उनके लिये डॉक्टर रिश्ता लाओ, मर जाओ

Shortest Horror story
" Tumhare liye Rishte Aaye hain"
सबसे छोटी खौफनाक कहानी :  "तुम्हारे लिये रिश्ते आये है।"


Q: What is the National Food of India? भारतका राष्ट्रीय खाद्य
A: Kasam                                                  कसम

ये पॉसिबल नही है, वरना हम इंडियन्स टूथपेस्टकी तरह गॅस सिलिंडरकोभी  दबा दबाकर गॅस निकाल लें ।

Tuesday, 23 July 2019

कुछ शेर अर्ज हैं।

कुछ शेर अर्ज हैं।

१.
*कभी साथ बैठो..*
*तो कहूँ कि दर्द क्या है...*

*अब यूँ दूर से पूछोगे..*
*तो ख़ैरियत ही कहेंगे...*

२.
 *सुख मेरा काँच सा था..*
*न जाने कितनों को चुभा गया..!*

३.
*आईना आज फिर,*
*रिशवत लेता पकड़ा गया..*
*दिल में दर्द था और चेहरा,*
*हंसता हुआ पकड़ा गया...*

४.
*वक्त, ऐतबार और इज्जत,*
*ऐसे परिंदे हैं..*
*जो एक बार उड़ जायें*
*तो वापस नहीं आते...*

५.
*दुनिया तो एक ही है,*
*फिर भी सबकी अलग है...*

६.
*दरख्तों से रिश्तों का,*
*हुनर सीख लो मेरे दोस्त..*
*जब जड़ों में ज़ख्म लगते हैं,*
*तो टहनियाँ भी सूख जाती हैं...*

७.
*कुछ रिश्ते हैं,*
*...इसलिये चुप हैं ।*

*कुछ चुप हैं,*
*...इसलिये रिश्ते हैं ।।*

८.
*मोहब्बत और मौत की,*
*पसंद तो देखिए..*
*एक को दिल चाहिए,*
*और दूसरे को धड़कन...*

९.
*जब जब तुम्हारा हौसला,*
*आसमान में जायेगा..*
*सावधान, तब तब कोई,*
*पंख काटने जरूर आयेगा...*

१०.
*हज़ार जवाबों से,*
*अच्छी है ख़ामोशी साहेब..*

*ना जाने कितने सवालों की,*
 *आबरू तो रखती है...*
👍🌹

-----------------------------

 कह दो समुंदर से कि लहरों को संभालकर रखें,
मेरे अपने ही काफी हैं जिंदगी में तूफान लाने के लिए.
 बहुत कमिया निकालने लगे हैं हम दूसरों में …
आओ एक मुलाक़ात ज़रा आईने से भी कर लें…

दिखावे की मोहब्बत तो जमाने को हैं हमसे पर...,, ये दिल तो वहाँ बिकेगा जहाँ ज़ज्बातो की कदर होगी !!
🌝
 एक शाम आती है तुम्हारी याद लेकर
एक शाम जाती है तुम्हारी याद देकर
पर मुझे तो उस शाम का इंतेज़ार है,
जो आए तुम्हे अपने साथ लेकर
 😭 💔 😢

--


*फुर्सत में करेंगे* 
  तुझसे हिसाब-ए-ज़िन्दगी;
     अभी तो उलझे हैं
       खुद को सुलझाने में...

 *इसका दिल रखा और* 
  कभी उसका दिल रखा
    इसी कशमकश में भूल गए
     खुद का दिल कहा रखा है।

 *फिसलती ही चली गई* 
    एक पल भी रुकी नहीं,
    अब जा के महसूस हुआ 
      रेत के जैसी है जिंदगी !.

 *कौन है जिसके पास* 
      कमी नहीं है।
      आसमाँ के पास भी 
          जमीं नहीं है।।

*चलें चलकर*,
   सुकून ही ढूंढ़ लाएँ..!!
       ख्वाहिशें तो 
        खत्म होने से रहीं....!!

-- 

Sunday, 7 July 2019

आम का सेहरा

आम के बारे में कुछ खास बातें 
         
                              ..... सागर खैयामी

"आम का सेहरा"


जो आम मैं है वो लब ए शीरीं मैं नहीं रस,
रेशों मैं हैं जो शेख़ की दाढ़ी से मुक़द्दस,

आते हैं नज़र आम, तो जाते हैं बदन कस,
लंगड़े भी चले जाते हैं, खाने को बनारस,

होटों पे हसीनों के जो, अमरस का मज़ा है,
ये फल किसी आशिक़ की, मोहब्बत का सिला है

आमद से दसहरी की है, मंडी में दस्हेरा,
हर आम नज़र आता है, माशूक़ का चेहरा,

एक रंग में हल्का है, तो एक रंग में गहरा,
कह डाला क़सीदे के एवज़, आम का सेहरा,

ख़ालिक़ को है मक़सूद, के मख़्लूक़ मज़ा ले,
वो चीज़ बना दी है के बुड्ढा भी चबा ले,

फल कोई ज़माने में नहीं, आम से बेहतर,
करता है सना आम की, ग़ालिब सा सुख़नवर,

इक़बाल का एक शेर, क़सीदे के बराबर,
छिलकों पा भिनक लेते हैं , साग़र से फटीचर,

वो लोग जो आमों का मज़ा, पाए हुए हैं,
बौर आने से पहले ही, बौराए हुए हैं,

नफ़रत है जिसे आम से वो शख़्स है बीमार,
लेते है शकर आम से अक्सर लब ओ रुख़सार,

आमों की बनावट में है, मुज़मर तेरा दीदार,
बाज़ू वो दसहरी से, वो केरी से लब ए यार,

हैं जाम ओ सुबू ख़ुम कहाँ आँखों से मुशाबे,
आँखें तो हैं बस आम की फांकों से मुशाबे,

क्या बात है आमों की हों देसी या बिदेसी,
सुर्ख़े हों सरौली हों की तुख़्मी हों की क़लमी,

चौसे हों सफ़ैदे हों की खजरी हों की फ़जरी,
एक तरफ़ा क़यामत है मगर आम दसहरी !

फ़िरदौस में गंदुम के एवज़ आम जो खाते,
आदम कभी जन्नत से निकाले नहीं जाते !!

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लब-ए-शीरीं لب شیریں  luscious lips, sweet lips
मुक़द्दस -  परम पवित्र और पूज्य।
कस - कसौटी (जैसे—कस पर खींचना)। दाब, क़ाबू (जैसे—उसे कसकर रखना, कस में रखना)। दृढ़ता, मज़बूती।
सिलाصلہ - present, gift, reward प्रतिकार, बदला, प्रत्यपकार, बुराई का बदला, प्रत्युपकार, भलाई का बदला, पुरस्कार, इन्आम, उपहार, तोहफ़ा, किसी परिश्रम का फल या बदला, धन के रूप में हो या किसी दूसरे रूप में।
आमदآمد - arrival, advent, income, visit आगमन, आय, आमदनी
खालिक - बनानेवाला, सृष्टिकर्ता, ईश्वर।
मक़सूद - अभिप्रेत, उद्दिष्ट।
मख़लूक - रचा या बनाया हुआ।  जीव-समष्टि; सृष्टि; दुनिया; जगत; जीव-जंतु।
हर्फ़-ए-सनाحرف ثنا words of praise
सुख़न-वरسخن ور - eloquent, poet
बौर - आम की मंजरी।
रुख़सार - कपोल, गाल
खुम - मटका, घड़ा।
फ़िरदौस - वाटिका, बाग। स्वर्ग, बहिश्त।
गंदुम - गेहूँ।
आदम - मनुष्य, व्यक्ति। आदि पुरुष


Sunday, 9 June 2019

अनमोल वचन


*  एक बार राधाने कृष्णसे पूछाः दोस्त और प्यारमें क्या फर्क होता है?
कृष्ण हंसकर बोलेः प्यार सोना है और दोस्त हीरा. सोना टूटकर दुबारा बन सकता है, मगर हीरा नही।

*  दिन बार के काम के बाद,
बेटा पूछता है  क्या लाये ???
बीवी पूछती ही कितना बचाया ???
पापा पूछते ही कितना कमाया???
लेकिन माँ पूछेगी, बेटा कुछ खाया ???

*  कुए में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है, तो भरकर बाहर आती है...
जीवन का भी यही गणित है, जो झुकता है वह प्राप्त करता है...

*  जीवन में किसी का भला करोगे, तो लाभ होगा... क्योंकि भला का उल्टा लाभ होता है ।

और

*  जीवन में किसी पर दया करोगे, तो वो याद करेगा... क्योंकि दया का उल्टा याद होता है।


*  भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने 'इन्सानो ' की.

*  जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया, शौक तो माँ-बाप के पैसों से पूरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पूरी होती है।

*  माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती, यहाँ आदमी आदमी से जलता है..

* दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा कि जीवन में मंगल है या नही..

*  ग़ालिब ने खूब कहा है - ऐ चाँद तू किस मजहब का है ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा..
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Friday, 29 March 2019

ये जिंदगी है यारों

मैने कई दिनोंसे इस ब्लॉग की तरफ ध्यान नही दिया था। फिर भी कुछ वाचक इस ब्लॉग को देखते, पढते रहे यही मेरे लिये बडीही खुशीकी बात है। मैं उनका शुक्रगुजार हूँ।
आज से मै फिर इस पिटारे में कुछ न कुछ जमा करता रहूँगा। आज एक दिलचस्प  कविता सादर कर रहा हूँ। कवि का नाम मुझे भी पता नही। वह जो भी हो उसका मैं  शुक्रगुजार हूँ।

१. ये जिंदगी है यारों,

कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!

पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !

बार बार रफू करता रहता हूं
जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं...,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

खटखटाते रहिए दरवाजा...,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

उड़ जाएंगे एक दिन ...,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर...,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

ना  राज़ है... "ज़िन्दगी",
ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर...बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!

         🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻


२.  बहुत हैं

वक्त पे न पहचाने कोई , ये अलग बात है,
वैसे तो शहर में अपनी , पहचान बहुत हैं।

खुशियां कम, और अरमान बहुत हैं,
जिसे भी देखिए यहां, हैरान बहुत हैं।

करीब से देखा तो, है रेत का घर,
दूर से मगर उसकी, शान बहुत हैं,

कहते हैं, सच का कोई सानी नहीं,
आज तो झूठ की, आन-बान बहुत हैं।

मुश्किल से मिलता है, शहर में आदमी,
यूं  तो कहने को, इन्सान बहुत हैं।

तुम शौक से चलो, राहें-वफा लेकिन,
जरा संभल के चलना, तूफान बहुत हैं।

वक्त पे न पहचाने कोई, ये अलग बात हे,
वैसे तो शहर में अपनी, पहचान बहुत हैं।
  🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 

३. इसी का नाम ज़िन्दगी है

कुछ दबी हुई ख़्वाहिशें है, 
कुछ मंद मुस्कुराहटें....
कुछ खोए हुए सपने है, 
कुछ अनसुनी आहटें....
कुछ दर्द भरे लम्हे है, 
कुछ सुकून भरे लम्हात.....
कुछ थमें हुए तूफ़ाँ हैं, 
कुछ मद्धम सी बरसात.....
कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ हैं, 
कुछ नासमझ इशारे.....
कुछ ऐसे मंझधार हैं, 
जिनके मिलते नहीं किनारे....
कुछ उलझनें है राहों में, 
कुछ कोशिशें बेहिसाब....
बस इसी का नाम ज़िन्दगी है चलते रहिये, जनाब.

Thursday, 23 June 2016

शराब - महान शायरों का नजरिया

शराब - एक ही विषय पर 6 महान शायरों का नजरिया -

Mirza Ghalib मिर्जा गालिब  :
"शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर ,
या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं ।"

Iqbal इकबाल :
"मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह नहीं,
काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं ।"

अहमद फराज Ahmad Faraz :
"काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर ,
खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नहीं ।"

वासी Wasi :
"खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,
तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं ।"

साकी Saqi :
"पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,
जन्नत में कौनसा ग़म है इसलिए वहाँ पीने में मजा नहीं ।"

शायर ? Shayar ?:
सब पीते अपने मज़े के लिए, बेवजह बदनाम गम है,
तबियत से पी कर देखो, फिर दुनिया क्या  जन्नत से कम है ।

-------

शराब के बारे में कुछ और बातें 

🥃 🥃
*मुझे शराब से महोब्बत नही है
*महोब्बत तो उन पलो से है
*जो शराब के बहाने मैं
*दोस्तो के साथ  बिताता हूँ।

 🥃🥃
*शराब तो ख्वामखाह ही बदनाम है..
नज़र घुमा कर देख लो..
इस दुनिया में..
शक्कर से मरने वालों की तादाद बेशुमार हैं!
                                             🥃🥃
तौहीन ना कर शराब को कड़वा कह कर,
जिंदगी के तजुर्बे, शराब से भी कड़वे होते है...

🥃🥃
कर दो तब्दील *अदालतों* को *मयखानों* में साहब;
सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता ! 
                                                                🥃🥃
सबसे कड़वी चीज़ इन्सान की *ज़ुबान* है,
*दारू और करेला*, तो खामखां बदनाम हैं !

🥃🥃🥃🥃🥃🥃🥃

"बर्फ का वो शरीफ टुकड़ा  जाम में क्या गिरा... बदनाम हो गया..."

"देता जब तक अपनी सफाई...    वो खुद शराब हो गया....."

*ताल्लुकात बढ़ाने हैं तो....*
*कुछ आदतें बुरी भी सीख ले गालिब,*

*ऐब न हों तो.....*
*लोग महफ़िलों में नहीं बुलाते ....*
🥃🥃🥃🥃
🤣🤣🤣🤣
--

Saturday, 2 April 2016

इन दिनों ...... कहाँ से आये ?

👗 कपड़े हो गए छोटे,
🙈 लाज कहाँ से आए ?

🌾 रोटी हो गई ब्रेड,
💪 ताकत कहाँ से आए ?

🌺 फूल हो गए प्लास्टिक के,
😔 खुशबू कहाँ से आए ?

👩 चेहरा हो गया मेकअप का,
👸 रूप कहाँ से आए ?

👨 शिक्षक हो गए टयुशन के,
📚 विद्या कहाँ से आए ?

🍱 भोजन हो गए होटल के,
✊ तंदरुस्ती कहाँ से आए ?

📺 प्रोग्राम हो गए केबल के,
🙏 संस्कार कहाँ से आए ?

💵 आदमी हो गए पैसे के,
🙉 दया कहाँ से आए ?

🏭 धंधे हो गए हायफाय,
🎁 बरकत कहाँ से आए ?

👳 भक्ति करने वाले हो गये स्वार्थी,
👤 भगवान कहाँ से आए ?

👫 रिश्तेदार  हो गये व्हाट्सऐप के,
💃🏃 मिलने कहाँ से आए ?
😂😂😪😥😰😂😂


इस संकलन के लिये गाजियाबाद के श्री एन सी गुप्ताजी को धन्यवाद।

Thursday, 24 March 2016

मेरे भैंस को डंडा क्यूँ मारा

 भैंसोंको भी पता चल ही गया की कोई उनकी तरफसे भी खडा होता है। यकीन न हो तो इस गानेको  देख और सुन लीजिये।
https://www.youtube.com/watch?v=gP4jHdxko4g

अब भैंसे भी बेजुबान नही रही। एक भैंस ने उसकी व्यथा वॉट्स अॅप पर इस तरह पेश की है। इस लेख के मूल लेखक को धन्यवाद देकर उसकी अनुमती के लिये प्रार्थना करता हूँ।

🐃 एक भैंस की दर्द भरी दास्तान :-

बच्चा जब थोड़ा बड़ा होता है, दूध मेरा पीता है !
वो भी बोर्नविटा डाल डाल कर !
और निबंध लिखने के लिये दूसरे जानवर क्यों ??

यदि बच्चा लिख नहीं पाता,
तो बोलते है "काला अक्षर भैंस बराबर"
तो क्या दूसरे जानवर पोस्ट ग्रेजुएट हैं ??

यदि कोई गलती करे तो लोग कहते हैं "गयी भैंस पानी में।"
अजी हम पानीमें जाये तो भी हमने किसका क्या बिगाड़ा है ?
गलती कोई दूसरा करे और बदनामी हमारी होती है !!

हम भी अन्य सब जानवरों की तरह ही हैं !
फिर भी इतना ज्यादा भेद-भाव झेलते हैं !
ग से गाय
ब से बंदर
ऊ से ऊल्लू  पढाया जाता है, तो फ़िर
भ से भैंस लिखने में आपका क्या जाता है ??

हमारा दूध पीकर हमसे ही गद्दारी !
कोईं औरत सीधी हो तो उसकी गाय से तुलना करते हो, और मोटी हो तो भैंस ??

हम पर जुल्म अलग !
यदि कोईं जंगली जानवर को मार दे, तो सजा दी जाती है !
और यदि हमको मार दे, तो कुछ नहीं !
उल्टा पूछते हैं "हमने कौन सी तुम्हारी भैंस मारी है"।

और तो और यदि कोईं बीच रास्ते में खड़ा हो जाए,
तो कहते हो कि "क्या भैंस के जैसा खड़ा है?"

हमारी मेजोरिटी के बारे में आप सब जानते हैं !
जिस दिन धरना प्रदर्शन कर देंगें,
होटलों से लेकर पाँच सितारा तक सब हिला के रख देंगें !!

हमारा केवल यही निवेदन है कि
हमें भी अन्य जानवरों जैसा ही मान सम्मान मिले !
हम पर फब्तियाँ कसना बंद हो !
अन्यथा,
दही, मावे की मिठाईयाँ, पनीर की सब्जियाँ, केशरिया दूध,
और भी सैकड़ों आयटम हैं,
सब भूल जाओ !!

केजरीवाल से बात हो गई है !
एक दिन गाय का दूध और एक दिन भैंस का दूध दिल्ली में.
फिर मिलेंगे धरना स्थल "राम लीला मैदान" पर

हमारे साथ ये असहिष्णुता बंद हो।

😊🐃😀🐃😃🐃😊🐃😀🐃😃🐃😊🐃😀🐃😃🐃


भैंसोंकी के बारेमें और भी कुछ यहाँ  भैंसचालीसा में पढियेगा ।
http://www.fulldhamaal.com/sher-o-shayari/%e0%a4%85%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%99%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8-akal-badi-ki-bhains-33459.htm

Monday, 14 March 2016

बावरे हिंदी मुहावरे

हिंदी के मुहावरे,बड़े ही बावरे है,
खाने पीने की चीजों से भरे है ।
कहीं पर फल है तो कहीं आटा दालें  है ,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है ।
फलों की ही बात ले लो....
आम के आम, गुठलियों के भी दाम मिलते है,
कभी अंगूर खट्टे हैं,
कभी खरबूजे,
खरबूजे को देख कर रंग बदलते है।
कहीं दाल में काला है,
कोई डेड़ चावल की खिचड़ी पकाता है,
कहीं किसी की दाल नहीं गलती,
कोई लोहे के चने चबाता है,
कोई घर बैठा रोटियाँ तोड़ता है,
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है, मुफलिसी में जब आटा गीला होता है ,
तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है।
सफलता के लिए बेलने पड़ते है कई पापड़,
कभी कभी सीधी उँगलीसे घी नहीं निकलता तो टेढी उँगलीसे भी निकालना पड़ता है।
आटे में नमक तो जाता है चल, पर गेहूँ के साथ, घुन भी पिस जाता है ।
अपना हाल तो बेहाल है, ये मूँग और मसूर की दाल है,
गुड खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं,
और गुड़ का गोबर कर बैठते हैं।
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड बनता है,
कभी ऊँट के मुंह में जीरा है ।
कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है।
किसी के दाँत दूध के हैं ,
किसी को छटी का दूध याद आ जाता है ,
दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है ,
और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है ।
शादी बूरे के लड्डू हैं , जिसने खाए वो भी पछताए,
और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं ।
पर शादी की बात सुन, मन में लड्डू फूटते है ,
और शादी के बाद, दोनों हाथों में लड्डू आते हैं ।
कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है,
किसी के मुंह में घी शक्कर है, सबकी अपनी अपनी तकदीर है।
कभी कोई चाय पानी करवाता है,
कोई मख्खन लगाता है।
और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है ,
तो सभी के मुंह में पानी आता है ।
भाई साहब अब कुछ भी हो ,
घी तो खिचड़ी में ही जाता है।
जितने मुँह है, उतनी बातें हैं,
सब अपनी अपनी बीन बजाते है।
पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है ,
सभी बहरे है, बावरें है
ये सब हिंदी के मुहावरें हैं ।

- - - - - - - - - 

🪓 अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना 🪓 

एक स्कूल में शिक्षा विभाग से निरीक्षण के लिए अधिकारी आया।

 वह एक हिंदी की कक्षा में गया और हिंदी अध्यापिका से पूछने लगा अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना इस मुहावरे का वाक्य प्रयोग करके बताएं।

कुछ सोचकर अध्यापिका बड़े आत्मविश्वास से बोली- 
“मैंने अपनी बेटी को दसवीं कक्षा में मोबाइल दिला कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।“

निरीक्षक बोला “यह तो जानबूझ कर कुएं में कूदने जैसी बात हुई, पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाली नहीं।
 कोई और वाक्य प्रयोग बताओ।”

अध्यापिका कुछ क्षण सोचते हुए, “रमेश ने अपनी पत्नी को अपना क्रेडिट कार्ड देकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।”

निरीक्षक फिर बोला- इसे तो ‘ मजबूरी का नाम महात्मा गांधी ’ कहेंगे । बीवी को क्रेडिट कार्ड देना पति की न टाली जा सकने वाली मजबूरी होती है, कोई सटीक वाक्य प्रयोग बताओ।

बहुत सोच विचार कर अध्यापिका को अपने पति की कही एक बात याद आई वह बोली-  कल ही मेरे पति कह रहे थे कि तुम्हारी सुंदरता पर रीझकर मैं तुमसे शादी कर बैठा और अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली।

निरीक्षक जोर जोर से हंसने लगा और बोला, “यह तो *आंख का अंधा नाम नैनसुख * का उदाहरण है।”

अब तो अध्यापिका का भी पारा चढ़ गया और वह गुस्से से बोली – “इस स्कूल में टीचर बनकर मैंने अपने पैरों पर 🪓 कुल्हाडी मार ली।”

निरीक्षक फिर बोला “यह तो 
💃 * नाच न जाने आंगन टेढ़ा * वाली बात हुई, इसमें 🪓 कुल्हाडी कहाँ है?”

अब तो अध्यापिका का भी सिर घूम गया और वह गुस्से से फट पडी- “मेरे साथ ज्यादा तीन-पाँच मत करो वरना तुम्हारी राई का ऐसा पहाड़ बनाऊंगी कि दिन में तारे नज़र आ जाएंगे। चुपचाप यहां से नौ दो ग्यारह हो जाओ वरना आज…, अभी…, इसी जगह, 
🐉 सांप भी मरेगा और लाठी भी टूटेगी *...।”

उसका रौद्ररूप देख निरीक्षक घबरा गया, “ओह, लगता है आज मैंने गलती से अपने पैरों पर खुद ही 🪓  कुल्हाड़ी मार ली और वह वहां से भाग गया।
😂 🪓

Thursday, 28 January 2016

हर हाल में खुश रहो ।


छोटी सी ज़िंदगी है, हर बात में खुश रहो ।
जो चेहरा पास ना हो, उसकी आवाज में खुश रहो ।।

कोई रूठा हो तुमसे, उसके इस अन्दाज में खुश रहो ।
जो लौट कर नहीं आने वाले, उन लम्हों की याद में खुश रहो ।।

कल किसने देखा है, अपने आज में खुश रहो ।
खुशियों का इन्तजार किसलिए, दूसरों की मुस्कान में खुश रहो ।।

क्यों तड़पते हो हर पल किसी के साथ को, कभी-कभी अपने आप में खुश रहो ।
छोटी सी तो ज़िंदगी है, हर हाल में खुश रहो ।।

Friday, 18 December 2015

क्या ख़ूब लिखा है किसीने, इस जिंदगी के बारेमें

क्या ख़ूब लिखा है किसीने, इस जिंदगी के बारेमें


आगे सफर था और पीछे हमसफर था,
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता ।

मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी,
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता ।

मुद्दत का सफर भी था और बरसो का हमसफर भी था,
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते ।

यूँ सँमझ लो, प्यास लगी थी गजब की, मगर पानी मे जहर था ।
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते ।
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए,
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए ।


वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता,
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता ।

सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब ।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर ।

"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है ।


"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने, वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता ।"

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी, जवानी का लालच दे के बचपन ले गया ।
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा ।

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया कि..
 जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।

बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली,
बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी ।

भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ' अपनो ' की ।

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है।

हंसने की इच्छा ना हो, तो भी हसना पड़ता है,
कोई जब पूछे कैसे हो ? तो मजे में हूँ कहना पड़ता है ।
ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों,
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है ।

"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती,
यहाँ आदमी आदमी से जलता है !"

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट, ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा कि जीवन में मंगल है या नहीं।

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि,
पत्थरों को मनाने में , फूलों का क़त्ल कर आए हम ।
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने, वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।

Friday, 4 September 2015

ये इनसान भी ना ???

ये इनसान भी ना जाने कैसे कैसे होते हैं।

लोग डूबते हैँ तो    ... समुंदर को दोष देते हैँ,
मंजिल ना मिले तो   ....  किस्मत को दोष देते हैँ,
खुद तो संभल कर चलते नहीँ जब ठोकर लगती है,
तो पत्थर को दोष देते हैँ ।
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उफ् ये इनसान

बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।

आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर,
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।

गिद्ध भी कहीं चले गए
लगता है उन्होंने देख लिया कि,
इंसान हमसे अच्छा नोंचता है।

कुत्ते कोमा में चले गए,ये देख कर कि इंसान तलवे मस्त चाटते है।
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चार बातें हमेशा याद रखो ।

पहली बात:-
हर इंसान इतना बुरा नही होता,
जितना वो पॅन कार्ड और आधार कार्ड मैं दिखता है।
और इतना अच्छा भी नही होता,
जितना वो फेस बुक और वॉटस अप पर दिखता है।

दूसरी बात:-
हर आदमी इतना बुरा नही होता,
जितना उसकी बीबी उसको समझती है।
 और इतना अच्छा भी नहीं होता,
 जितना उसकी माँ उसको समझती है।

तीसरी बात:-
हर आदमी अपनी लाइफ पार्टनर के बारे मैं सोचता है कि वो मिस यूनिवर्स दिखे
और घर मैं काम शांता बाई की तरह करे।

चौथी बात:-
हर औरत अपने लाइफ  पार्टनर के बारे मै सोचती है की वो
अम्बानी तरह कमाए और व्यवहार मनमोहन सिंह की तरह करे।

थोडा सा हँस भी लिया करो।

Sunday, 30 August 2015

क्या यही जिंदगी है...??

यह रचना मेरे मित्र श्री विनोद अगरवालने ई मेल पर भेजी है। उनको प्रणाम और धन्यवाद।
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ज़िंदगी के 20 वर्ष हवा की तरह उड़ जाते हैं.! फिर शुरू होती है नौकरी की खोज.! ये नहीं वो, दूर नहीं पास. ऐसा करते 2-3 नौकरीयां छोड़ते पकड़ते, अंत में एक तय होती है, और ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की शुरूआत होती है. !
और हाथ में आता है पहली तनख्वाह का चेक, वह बैंक में जमा होता है और शुरू होता है... अकाउंट में जमा होने वाले कुछ शून्यों का अंतहीन खेल..!

इस तरह 2-3 वर्ष निकल जाते हैँ.!
'वो' स्थिर होता है.
बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं.
इतने में अपनी उम्र के पच्चीस वर्ष हो जाते हैं.!

विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है. एक खुद की या माता पिता की पसंद की लड़की से यथा समय विवाह होता है और ज़िंदगी की राम कहानी शुरू हो जाती है.!

शादी के पहले 2-3 साल नर्म, गुलाबी, रसीले और सपनीले गुज़रते हैं.!
हाथों में हाथ डालकर बातें और रंग बिरंगे सपने.!
पर ये दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं और इसी समय शायद बैंक में कुछ शून्य कम होते हैं.!
क्योंकि थोड़ी मौजमस्ती, घूमना फिरना, खरीदी होती है.!

और फिर धीरे से बच्चे के आने की आहट होती है और वर्ष भर में पालना झूलने लगता है.!

सारा ध्यान अब बच्चे पर केंद्रित हो जाता है.! उसका खाना पीना , उठना बैठना, शु-शु, पॉटी, उसके खिलौने, कपड़े और उसका लाड़ दुलार.!
समय कैसे फटाफट निकल जाता है, पता ही नहीं चलता.!

इन सब में कब इसका हाथ उसके हाथ से निकल गया, बातें करना, घूमना फिरना कब बंद हो गया, दोनों को ही पता नहीं चला..?

इसी तरह उसकी सुबह होती गयी और बच्चा बड़ा होता गया...
वो बच्चे में व्यस्त होती गई और ये अपने काम में.!
घर की किस्त, गाड़ी की किस्त और बच्चे की ज़िम्मेदारी, उसकी शिक्षा और भविष्य की सुविधा और साथ ही बैंक में शून्य  बढ़ाने का टेंशन.!
उसने पूरी तरह से अपने आपको काम में झोंक दिया.!
बच्चे का स्कूल में अॅडमिशन हुआ और वह बड़ा होने लगा.!
उसका पूरा समय बच्चे के साथ बीतने लगा.!

इतने में वो पैंतीस का हो गया.!
खूद का घर, गाड़ी और बैंक में कई सारे शून्य.!
फिर भी कुछ कमी है..?
पर वो क्या है समझ में नहीं आता..!
इस तरह उसकी चिड़-चिड़ बढ़ती जाती है और ये भी उदासीन रहने लगता है।

दिन पर दिन बीतते गए, बच्चा बड़ा होता गया और उसका खुद का एक संसार तैयार हो गया.! उसकी दसवीं आई और चली गयी.!
तब तक दोनों ही चालीस के हो गए.!
बैंक में शून्य बढ़ता ही जा रहा है.!

एक नितांत एकांत क्षण में उसे वो गुज़रे दिन याद आते हैं और वो मौका देखकर उससे कहता है,
"अरे ज़रा यहां आओ, पास बैठो.!"
चलो फिर एक बार हाथों में हाथ ले कर बातें करें, कहीं घूम के आएं...! उसने अजीब नज़रों से उसको देखा और कहती है,
"तुम्हें कभी भी कुछ भी सूझता है. मुझे ढेर सा काम पड़ा है और तुम्हें बातों की सूझ रही है..!" कमर में पल्लू खोंस कर वो निकल जाती है.!

और फिर आता है पैंतालीसवां साल,
आंखों पर चश्मा लग गया,
बाल अपना काला रंग छोड़ने लगे,
दिमाग में कुछ उलझनें शुरू हो जाती हैं,
बेटा अब कॉलेज में है,
बैंक में शून्य बढ़ रहे हैं, उसने अपना नाम कीर्तन मंडली में डाल दिया और...

बेटे का कॉलेज खत्म हो गया, वह अपने पैरों पर खड़ा हो गया.!
अब उसके पर फूट गये और वो एक दिन परदेस उड़ गया...!!!

अब उसके बालों का काला रंग और कभी कभी दिमाग भी साथ छोड़ने लगा...!
उसे भी चश्मा लग गया.!
अब वो उसे उम्र दराज़ लगने लगी क्योंकि वो खुद भी बूढ़ा  हो रहा था..!

पचपन के बाद साठ की ओर बढ़ना शुरू हो गया.!
बैंक में अब कितने शून्य हो गए,
उसे कुछ खबर नहीं है. बाहर आने जाने के कार्यक्रम अपने आप बंद होने लगे..!

गोली-दवाइयों का दिन और समय निश्चित होने लगा.!
डॉक्टरों की तारीखें भी तय होने लगीं.!
बच्चे बड़े होंगे....
ये सोचकर लिया गया घर भी अब बोझ लगने लगा.
बच्चे कब वापस आएंगे,
अब बस यही हाथ रह गया था.!

और फिर वो एक दिन आता है.!
वो सोफे पर लेटा ठंडी हवा का आनंद ले रहा था.!
वो शाम की दिया-बाती कर रही थी.!
वो देख रही थी कि वो सोफे पर लेटा है.!
इतने में फोन की घंटी बजी,
उसने लपक के फोन उठाया,
उस तरफ बेटा था.!
बेटा अपनी शादी की जानकारी देता है और बताता है कि अब वह परदेस में ही रहेगा..!
उसने बेटे से बैंक के शून्य के बारे में क्या करना यह पूछा..?
अब चूंकि विदेश के शून्य की तुलना में उसके शून्य बेटे के लिये शून्य हैं इसलिए उसने पिता को सलाह दी..!"
एक काम करिये, इन पैसों का ट्रस्ट बनाकर वृद्धाश्रम को दे दीजिए और खुद भी वहीं रहिये.!"
कुछ औपचारिक बातें करके बेटे ने फोन रख दिया..!

वो पुनः सोफे पर आ कर बैठ गया. उसकी भी दिया बाती खत्म होने आई थी.
उसने उसे आवाज़ दी, "चलो आज फिर हाथों में हाथ ले के बातें करें.!"
वो तुरंत बोली, "बस अभी आई.!"
उसे विश्वास नहीं हुआ, चेहरा खुशी से चमक उठा, आंखें भर आईं,
उसकी आंखों से गिरने लगे और गाल भीग गए,
अचानक आंखों की चमक फीकी हो गई और वो निस्तेज हो गया..!!

उसने शेष पूजा की और उसके पास आ कर बैठ गई, कहा, "बोलो क्या बोल रहे थे.?"
पर उसने कुछ नहीं कहा.!
उसने उसके शरीर को छू कर देखा, शरीर बिल्कुल ठंडा पड़ गया था और वो एकटक उसे देख रहा था..!

क्षण भर को वो शून्य हो गई, "क्या करूं" उसे समझ में नहीं आया..!
लेकिन एक-दो मिनट में ही वो चैतन्य हो गई,  धीरे से उठी और पूजाघर में गई.!
एक अगरबत्ती जलाई और ईश्वर को प्रणाम किया और फिर से सोफे पे आकर बैठ गई..!

उसका ठंडा हाथ हाथों में लिया और बोली, "चलो कहां घूमने जाना है और क्या बातें करनी हैं तम्हे.!"
बोलो...!! ऐसा कहते हुए उसकी आँखें भर आईं..!
वो एकटक उसे देखती रही, आंखों से अश्रुधारा बह निकली.!
उसका सिर उसके कंधों पर गिर गया.!
ठंडी हवा का धीमा झोंका अभी भी चल रहा था....!!

यही जिंदगी है...??
नहीं....!!!

संसाधनों का अधिक संचय न करें,
ज्यादा चिंता न करें,
सब अपना अपना नसीब ले कर आते हैं.!
अपने लिए भी जियो, वक्त निकालो..!

सुव्यवस्थित जीवन की कामना...!!
जीवन आपका है, जीना आपने ही है...!!

Friday, 28 November 2014

जरा सोचिये

"जब मुझे यकीन है के भगवान मेरे साथ है।  तो इस से कोई फर्क नहीं पड़ता के कौन कौन मेरे खिलाफ है।।"

तजुर्बे ने एक बात सिखाई है..  .एक नया दर्द ही...  पुराने दर्द की दवाई है...!!

हंसने की इच्छा ना हो...तो भी हसना पड़ता है... कोई जब पूछे कैसे हो...?? तो मजे में हूँ कहना पड़ता है..

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों.... यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती.. यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि... पत्थरों को मनाने में, फूलों का क़त्ल कर आए हम।
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने .... वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ....

जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन  क्यूंकिएक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले .!!.

एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली.. वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे..!!

सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से.. पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!!

सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब.... बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता |

जीवन की भाग-दौड़ में - क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ? हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है..

एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम और आज कई बार बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है..

कितने दूर निकल गए, रिश्तो को निभाते निभाते.. खुद को खो दिया हमने, अपनों को पाते पाते..

लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है, और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते..

"खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ, लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह करता हूँ..

चाहता तो हु की ये दुनियाबदल दू .... पर दो वक़्त की रोटी केजुगाड़ में फुर्सत नहीं मिलती दोस्तों

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे . पता नही था की, 'किमत चेहरों की होती है!!'

अगर खुदा नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यों ?? और अगर खुदा हे तो फिर फिक्र क्यों ???

"दो बातें इंसान को अपनों से दूर कर देती हैं, एक उसका 'अहम' और दूसरा उसका 'वहम'..

" पैसे से सुख कभी खरीदा नहीं जाताऔर दुःख का कोई खरीदार नही होता।"

किसी की गलतियों को बेनक़ाब ना कर, 'ईश्वर' बैठा है, तू हिसाब ना कर

Thursday, 23 October 2014

दीपावली शुभ कामनाएँ





आज आपके यहाँ धन की बरसात हो ।
माँ लक्ष्मी का वास हो ।
संकटोंका नाश हो ।
हर दिलपर आप का राज हो ।
सरपर उन्नती का सरताज हो ।
घर में शांती का वास हो ।

दीपावली के शुभ अवसरपर शुभ कामनाएँ ।

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इस दीपावली पर

इतने दीपक जलाएं .. कि अँधेरा डरकर भाग जाए
इतना प्यार लुटाएं .. कि दुनिया से नफ़रत मिट जाये
इतनी मिठाइयाँ बाँटें  ..  कि भारत से भूख मिट जाये
इतनी गर्मजोशी से हाथ मिलाएं  ..  कि सारी दुश्मनी मिट जाए। 

अपने मन्दिर के साथ-साथ एक मस्जिद, एक गुरुद्वारे, एक गिरजे में भी दीपक लगाएं
ताकि भारत से धार्मिक उन्माद हट जाए।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक हमारा भारत अनगिनत दीपों की आवली से सज जाए।
हम सभी भारतवासी प्रेम की अमिट डोर से बन्ध जाएं
और दीपावली का यह पर्व सचमुच सार्थक हो जाए।

Saturday, 20 September 2014

रिश्ते या पतंग की डोर

बाप पतंग उड़ा रहा था बेटा ध्यान से देख रहा था। थोड़ी देर बाद बेटा बोला, "पापा ये धागे की वजह से पतंग और ऊपर नहीं जा पा रही है इसे तोड़ दो।"
बाप ने धागा तोड़ दिया, पतंग थोडा सा और ऊपर गई और उसके बाद नीचे आ गई।
तब बाप ने बेटे को समझाया, "बेटा जिंदगी में हम जिस ऊँचाई पर है, हमें अक्सर लगता है की कई चीजे हमें और ऊपर जाने से रोक रही है। जैसे घर, परिवार, अनुशासन, दोस्ती, और हम उनसे आजाद होना चाहते है।
मगर यही चीज होती है जो हमें उस ऊँचाई पर बना के रखती है। उन चीजों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे, मगर बाद में हमारा वो ही हश्र होगा, जो पतंग का हुआ। इसलिए जिंदगी में कभी भी अनुशासन का, घर का, परिवार का, दोस्तों का, रिश्ता कभी मत तोड़ना।"



.......................................................................... फेसबुक से

Saturday, 19 July 2014

संस्कृत सुभाषितोंका परिचय - २

सुभाषितोंकी मधुरता अपरंपार है।  सुभाषितोंका माधुर्य देख शराब (द्राक्षा) उदास (म्लान) हो गयी, शक्कर पत्थरके चूर्णके समान हो गयी और अमृत डरके मारे स्वर्गमे चली गयी। (सुभाषितोंका रस शराब, शक्कर और
अमृतसेभी अधिक मधुर होता है।)
सुभाषितोंकी संख्याका ध्यान रखते हुवे पचास सुभाषित पहले विभागमें रखकर अब यह दूसरा विभाग शुरू कर रहा हूँ।
पहले विभागके सारे सुभाषित इस लिंकपर पढे जा सकते हैं।
http://anandjikapitara.blogspot.in/2014/03/blog-post_30.html
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आजका सुभाषित

७५. निर्गुणेष्वपि सत्वेषु दयां कुर्वन्ति साधवः ।
न हि संहरते ज्योत्स्नाम् चन्द्कश्चांडालवेश्मनः।।
सज्जन लोग गुणहीनों पर भी दया करते हैं। चंद्रमा उसका प्रकाश चांडाल के घर पर से समेट नही लेता। (वह सभी लोगों को एक जैसा ही प्रकाश देता है।
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 उदारस्य तृणम् वित्तम् शूरस्य मरणम् तृणम् ।
विरक्तस्य तृणम् भार्या निःस्पृहस्य  तृणम् जगत् ।।
७४. उदार मनुष्य धनदौलत को तृण के समान तुच्छ समझता है। शूर पुरुषको मृत्यू तुच्छ लगता है। विरागी पुरुष को पत्नी महत्व हीन लगती है और निःस्पृह व्यक्ती को सारा संसार तुच्छ लगता है।. जिस प्रकार के व्यक्ती को जिस चीज की आसक्ती न हो वह चीज औरोंको भलेही बहुत महत्वपूर्ण लगती हो, उस व्यक्ती को वह घास जितनी तुच्छ प्रतीत होती है।

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विद्वत्वम् च नृपत्वम् च नैव तुल्य कदाचन ।
स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते ।।
७३. विद्वत्ता और राजा (सत्ताधीश) होना इनकी तुलना नही हो सकती।. राजा को केवल उसके राज्य मे पूजनीय माना जाता है, राजाका (शासकका) सम्मान  केवल उसी सीमा तक किया जाता है। मगर विद्वानका सम्मान सर्वत्र होता है।

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 नारिकेलसमाकाराः दृष्यन्ते खलु सज्जनाः ।
अन्ये बदरिकाकाराः बहिरेव मनोहराः ।।
७२. सज्जन लोग नारियल के बाहरी रूप जैसे दिखते हैं और अन्य लोग बेर के समान बाह्य रूप से सुंदर होते हैं।
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 सर्वनाशे समुत्पन्ने अर्धम् त्यजति पण़्डितः ।
अर्धेन कुरुते कार्यम् सर्वनाशोहि दुःसहः ।।
७१. सर्वनाश का समय आनेपर ज्ञानी मनुष्य आधेका त्याग करता है और बचाये हुवे आधे भाग से अपना काम चलाता है क्यों कि सर्वनाश सहन करना अधिक कठिन होता है।.

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परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्याः ।
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदम् शरीरम् ।।
७०. दूसरोंकी भलाई के लिये वृक्ष फल देते हैं, दूसरोंकी भलाई के लिये नदियाँ बहती हैं, दूसरोंकी भलाई के लिये गायें दूध देती हैं,  हमें यह शरीर दूसरोंकी भलाई के लिये ही मिला हैं।
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महाजनस्य संसर्गः कस्य नोन्नतिकारकः ।
पद्मपत्रस्थितम् तोयम् धत्त् मुक्ताफलश्रियम् ।।
६९. महापुरुषों के सहवास से किसकी उन्नति नही होती? (सभी की होती है।) कमल के पत्र पर पडी हुई पानी की बूँद मोती की सी शोभा धारण करती है।
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यथाचित्तम् तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रियाः।
चित्ते वाचि क्रियायाम् च साधूनामेकरूपता ।।
६८. जो मन में है वही वाणी से प्रकट हो। जो बोला गया है उसी के अनुसार तसेच कार्य हो। सज्जनों के मन, वचन और कार्य में एकरूपता होती है। जैसी कथनी वैसी ही करनी होती है।


स्वंत्रतादिन के सुअवसर पर यह सुभाषित


अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते ।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ।।
६७. हे लक्ष्मण, यह सोनेकी लंका मुझे नही भाती। मेरी माँ तथा जन्मभूमी (मातृभूमी) मुझे स्वर्ग से भी श्रेष्ठ प्रतीत होती है। लंकाविजय के पश्चात श्रीरामजीने वही रहनेका सुझाव दिया गया था, उस पर श्रीरामजीने यह उत्तर दिया था। 
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आरोप्यते शिला शैले यत्नेन महता यथा ।
पात्यते तु क्षणेनाधः तथात्मा गुणदोषयोः ।।
६६. पर्वतपर शिला चढाने के लिये बहुत कष्ट उठाने पडते है, परंतु उसे एक क्षण में नीचे गिराया जा सकता है। उसी तरह सद्गुण प्राप्त करना बहुत कठिन होता है, पर दुर्गुण अनायास ही प्राप्त होते है।
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खद्योतो द्योतते तावत् यावन्नोदयते शशी ।
उदिते तु सहस्रांशौ न खद्योतो न चन्द्रमा ।।
६५. जब तक चंद्र का उदय नही होता तब तक तारा या जुगनू चमकता है और सूर्योदय होने के बाद ना चंद्र चमकता है, ना तारे या ना जुगनू। जहाँ कोई महान व्यक्तिमत्व उपस्थित हो वहाँ किसी भी छोटे व्यक्ती का प्रभाव सीमित रहता है।

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गुणम् पृच्छस्व मा रूपम् , शीलम् पृच्छस्व मा कुलम् ।
सिद्धिम् पृच्छस्व मा विद्याम्, भोगम् पृच्छस्व मा धनम् ।।
६४. गुणोंके बारेमे विचार करो रूपके बारेमे नही, शीलके बारेमे विचार करो कुलके बारेमे नही, सिद्धीके बारेमे विचार करो विद्याके बारेमे नही, उपभोगके बारेमे विचार करो धनके बारेमे नही। मनुष्य के रूप, कुल, विद्या और धन इनकी पेक्षा उसके गुण, शील, यश और विनियोग इनका महत्व अधिक रहता है।
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अप्रार्थितानि दुःखानि यथैवायान्ति देहिनाम् ।
सुखानिच तथा मन्ये दैवमत्रातिरिच्यते।।
जिस प्रकार  प्रार्थना किये बिना दुख मिलते हैं, वैसे ही सुख भी मिल जाते हैं। इसमें दैव ही बलवत्तर होता है ऐसे मै मानता हूँ।.
६३. भाग्यसे सिर्फ दुख ही नही, सुख भी मिल जाते हैं इस तरह का अर्थ भी इस सुभाषित से निकाला जा सकता है।
यह संपूर्णतया दैववादी सिद्धान्त है। दुख से बचने या सुख पाने के वास्ते प्रयत्न ही न करें यह भी सही नही है। वह करने चाहिये ऐसे अन्य कई सुभाषितोंमे कहा गया है।

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एकस्य दुःखस्य न यादवन्तम् ।
गच्छाम्यहम् पारमिवार्णवस्य ।
तावत् द्वितीयम् समुपस्थितम् मे ।
छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति ।।
६२. मै ज्योंही एक दुःखसागरको पार कर लेता हूँ, दूसरा दुःखसागर सामने आ जाता है। छिद्र (कमजोरी) हो तो वहाँ अनर्थोंकी भरमार हो जाती है। (अपने किसी कमजोरीकी वजहसेही बहुतसे अनर्थ हो जाते हैं। कई दुखोंका कारण अपनाही कोई दोष होता है।)
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अलातम् तिन्दुकस्येव मुहूर्तमपि हि ज्वल ।
मा तुषाग्निरिवानर्चि धूमायस्व चिरम् पुनः ।।
६१. मशालकी तरह थोडेही समयके लिये क्यूँ ना हो, ज्वाला बनकर प्रकाश दे। चिरकालतक सिर्फ धुवाँ छोडते मत रहना। लंबी आयु जीनेसे छोटा पर तेजस्वी जीवन जीना बहतर है।

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 अधः करोषि रत्नानि मूर्ध्ना धारयसे तृणम् ।
दोषस्तवैव जलधे, रत्नम् रत्नम् तृणम् तृणम् ।।
६०. हे सागर, तुम रत्नोंको नीचे तलमें रखते हो और घासको अपने मस्तकपर धारण करते हो यह तुम्हाराही दोष है। आखिर रत्न रत्न ही होता है और घास घासही होती है। (हर किसीकी योग्यता समझ लेनी चाहिये और उसे
योग्य स्थान देना चाहिये।)

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यदीच्छसि वशीकर्तुम् जगदेकेण कर्मणा ।
परापवादसस्येभ्यो गाम् चरन्तीम् निवारय ।।
५९.  यदि संसारको अपने बसमे कर लेनेकी चाह हो तो एकही काम करो। परनिन्दारूपी फसलमे चरनेवाली अपनी बुद्धीरूपी गायको ठीकसे सम्हालो। (लोगोंको अपना बनाना हो तो परनिंदा करनेसे हमें बचना चाहिये।)
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चंदने विषधरान् सहामहे वस्तु सुंदरमगुप्तिमत्कुतः।
रक्षितुम् वद किमात्मसौष्ठवम् संचिताः खदिर कंटकास्त्वया।
५८. चंदनके पेडसे नाग लिपटे रहते है यह बात हम सहन कर सकते (समझ सकते) हैं। सुंदर वस्तूको असुरक्षित कैसे रख सकते है? मगर हे बबूल तू इन काटोंसे कौनसे सौंदर्यकी रक्षा कर रहे हो यह बात क्या तुम बता सकते
हो?
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आहार निद्रा भय मैथुनम् च सामान्यमेतत् पशुभिर्नराणाम्।
धर्मोहि तेषामधिको विशेषो धर्मेण हीना पशुभिः समानाः।।
५७. आहार, निद्रा, भय और मैथुन ये बातें मानव तथा पशू इन दोनोंमे समान होती है। मानवका धर्म यही एक विशेष (पशूओंसे अलग) बात है, धर्महीन मानव हा पशूसमान होता है।
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 वाङ्माधुर्यात् सर्वलोकप्रियत्वम् ।
वाक्पारुष्यात् सर्वलोकाप्रियत्वम् ।
किंवा लोके कोकिलेनोपकारः ।
किंवा लोके गर्दभेणाप्रकारः।।
५६. मधुर भाषणसे संसारमे लोकप्रियता मिलती है, पर कठोर वचनसे हम सब लोगोंमे अप्रिय हो जाते है। कोयलने संसारका कौनसा बडा उपकार किया है? (जो उसे लोकप्रियता मिली।) और गधेने किसीका क्या बुरा किया है? (जो वह किसीको नही भाता।)
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भद्रम् कृतम् कृतम् मौनम् कोकिलैः जलदागमे ।
दर्दुराः यत्र गायन्ति तत्र मौनं हि शोभनम् ।।
५५. आसमानमे काले बादल घिर आतेही (वर्षा ऋतूके प्रारंभ होतेही) कोयलोंने मौन धारण किया यह बात बहुत अच्छी हुई। जब मेंढकोंने गाना शुरू कर दिया हो, वहाँ (कोयलोंने) चुप रहनेमेही शोभा है।

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को न याति वशे लोके मुखे पिंडेन पूरितः ।
मृदुंगो मुखलेपेन करोति मधुरम् ध्वनिम् ।।
५४. मुखमें कुछ खाना खिलानेपर कौन बसमें नही आयेगा? मृदंगके मुखपर आटेका गोल थापनेपर वह भी तो मधुर आवाज करने लगता है। (संसारमे सारेही लोग खिलाने पिलानेपर खुष होकर मीठा बोलने लगते है।)
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माता यदि विषम् दद्यात् विक्रिणीते पिता सुतम् ।
राजा हरति सर्वस्वम् तत्र का परिवेदना ।।
५३. अगर माताही उसके बच्चेको जहर दे, पिताही बेटेको बेच दे और राजाही प्रजाका सर्वस्व लूट ले तो इसकी शिकायत कहाँ और कैसे करें? (अगर रक्षकही भक्षक न जाये तो क्या करे? बडीही मुश्किल होगी।)
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धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ।
तस्मात् धर्मो न हन्तव्यः मा नो धर्मः हतोsवधीत् ।।
५२. अगर कोई धर्मका नाश करेगा तो धर्म उसका नाश करता है और जो धर्मका रक्षण करता है उसका रक्षण धर्म करता है। हमे धर्मका नाश नही करना चाहिये ताकि वह अपना नाश नही करेगा। (सुभाषितोंकी रचनाके
कालमे  अलग अलग धर्म नही होते थे, धर्म इस शब्दका अर्थ नीतीनियम होता था)
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न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः । न ते वृद्धाः ये न वदन्ति धर्मम् ।। 
न असौ धर्मो यत्र न सत्यमस्ति । न तत्सत्यम् यच्छलेनाभ्युपेतम् ।।
५१. जहाँ वृद्ध जन न हो वह सभा नही, जो धर्म - नीतीकी बातें न करते हो वे वृद्ध नही, जिसमें सत्य न हो वह धर्म नही और जो कपटसे भरा हो वह सत्य नही। निष्कपट सत्य ही वास्तविक धर्म है जो वृद्ध जनोंके मुखसे
निःसृत होता है।

Tuesday, 17 June 2014

पितृदिन (फादर्स डे) के अवसरपर

पिताजी आज भी पैसे बचाते है .....
पुरानी पँट रफू करा कर पहनते जाते है, ब्रँडेड नई शर्ट देने पे आँखे दिखाते है,
टूटे चश्मे से ही अख़बार पढने का लुत्फ़ उठाते है, टोपँझ के ब्लेड से दाढ़ी बनाते है,
पिताजी आज भी पैसे बचाते है .....

कपड़े का पुराना थैला लिये दूर की मंडी तक जाते है,
बहुत मोल-भाव करके फल-सब्जी लाते है, आटा नही खरीदते, गेहूँ पिसवाते है,
पिताजी आज भी पैसे बचाते है .....

स्टेशन से घर पैदल ही आते है, रिक्शा लेने से कतराते है,
सेहत का हवाला देते जाते है ... बढती महंगाई पे चिंता जताते है,
पिताजी आज भी पैसे बचाते है .....

पूरी गर्मी पंखे में बिताते है,.. सर्दियां आने पर रजाई में दुबक जाते है,
एसी हीटरको सेहत का दुश्मन बताते है,  लाइट खुली छूटने पे नाराज हो जाते है,
पिताजी आज भी पैसे बचाते है .....

माँ के हाथ के खाने में रमते जाते है, बाहर खाने में आनाकानी मचाते है,
साफ़-सफाई का हवाला देते  जाते है, मिर्च, मसाले और तेल से घबराते है,
पिताजी आज भी पैसे बचाते है .....

गुजरे कल के किस्से सुनाते है, कैसे ये सब जोड़ा गर्व से बताते है,
पुराने दिनों की याद दिलाते है,  बचत की अहमियत समझाते है,
हमारी हर मांग आज भी, फ़ौरन पूरी करते जाते है,
अब पता लगा पिताजी हमारे लिए ही पैसे बचाते है ...

पितृदिन (फादर्स डे) के दिन सभी पिताओंको सादर प्रणाम ।
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बाप रे बाप !
एक छोटा बच्चा अपने पिताके साथ भीडसे भरे रास्तेपरसे जा रहा था । उसने अपने पितासे कहा, "पिताजी, मेरा हाथ पकडके रखिये, नही तो मै खो जाऊँगा।"
पिताने कहा, "अरे तुम्हे अगर इतनी फिक्र हो रही हो, तो तुमही मेरी उँगली थामे रखना।"
बेटेने कहा, "नही, शायद मेरा ध्यान इधर उधर गया तो मै आपकी उँगली छोड दूँगा, मगर चाहे कुछभी हो जाये,आप कभीभी मेरा हाथ नही छोडेंगे।"
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दूसरे एक बच्चेको उसके पिताने एक टेबलपर खडा किया और नीचे कूदने कहा। बोले, "डरो मत, मै हूँ ना।"
बच्चा कूद पडा, मगर बापने उसे पकडाही नही। वो औंधे मुँह गिर पडा।
पिताने उसे पूछा, "बेटा, तुमने इससे कौनसी सीख ली?"
बेटेने कहा, "अपने बापपरभी कभी भरोसा नही करना चाहिये।"
पिताने कहा, "बिलकुल सही कहा। अब तुम अच्छी तरहसे धंदेको सम्हालोगे।"

Monday, 2 June 2014

ये जो है जिंदगी

इस पोस्ट में दी हुई कोई भी रचना मेरी खुदकी नही है। ये मुझे इंटरनेटपर मिली है। मै इनके कविवर्योंको नही जानता मगर उनका शुक्रगुजार हूँ।

क्या से क्या होते देखा है।

मैंने  हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है ....
उम्र के साथ जिंदगी को ढंग बदलते देखा है .. !!

वो जो चलते थे तो शेर के चलने का. होता था गुमान..
उनको भी  पाँव उठाने के लिए सहारे को तरसते देखा है !!

जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग ..
उन्ही  नजरों को  बरसात  की तरह  रोते देखा है .. !!

जिनके  हाथों के  जरा से इशारे से  टूट जाते थे पत्थर ..
उन्ही  हाथों को  पत्तों की तरह  थर थर काँपते देखा है .. !!

जिनकी आवाज़ से कभी  बिजली के कड़कने का  होता था भरम ..
उनके  होठों पर भी जबरन  चुप्पी का ताला लगा देखा है .. !!

ये जवानी  ये ताकत  ये दौलत  सब कुदरत की. इनायत है ..
इनके रहते हुए भी  इंसान को  बेजान हुआ देखा है ... !!

अपने  आज पर  इतना ना  इतराना  मेरे यारों ..
वक्त की धारा में अच्छे अच्छों को  मजबूर हुआ देखा है .. !!!

  कर सको तो किसी को खुश करो....
  दुःख देते तो हजारों को देखा है.. ।

२३ ऑगस्ट २०१५

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आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है।
कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है।

रफ्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ गए, कुछ छूट गए ।
रूठों को मनाना बाकी है, रोतो को हँसाना बाकी है ।

कुछ हसरतें अभी अधूरी है, कुछ काम भी और ज़रूरी है ।
ख्वाइशें जो घुट गयी इस दिल में, उनको दफनाना अभी बाकी है ।

कुछ रिश्ते बनके टूट गए, कुछ जुड़ते जुड़ते छूट गए।
उन टूटे-छूटे रिश्तों के ज़ख्मों को मिटाना बाकी है ।

तू आगे चल में आता हूँ, क्या छोड़ तुझे जी पाऊंगा ?
इन साँसों पर हक है जिनका , उनको समझाना बाकी है।

आहिस्ता चल जिंदगी , अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है ।

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 ये जो ज़िन्दगी की किताब है।
ये किताब भी क्या खिताब है।
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है।
कही जान-लेवा अज़ाब है।

कहीं छांव है कहीं धूप है।
कहीं और ही कोई रूप है।
कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये।
एक अजीब सा ये निकाब है।

कहीं खो दिया कहीं पा लिया।
कहीं रो लिया कहीं गा लिया।
कहीं छीन लेती है हर खुशी।
कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है।

कहीं आंसू की है दास्तान।
कहीं मुस्कुराहटों का है बयान।
कहीं बरकतों की हैं बारिशें।
कहीं तिशनगी बेहिसाब है।

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जो चाहा कभी पाया नहीं,
जो पाया कभी सोचा नहीं,
जो सोचा कभी मिला नहीं,
जो मिला रास आया नहीं,
जो खोया वो याद आता है,
पर जो पाया - संभाला जाता नहीं।।

क्यों अजीब सी पहेली है ज़िन्दगी,
जिसको कोई सुलझा पाता नहीं ?
जीवन में कभी समझौता करना पड़े
तो कोई बड़ी बात नहीं है,
क्योंकि  झुकता वही है जिसमें जान होती है,
अकड़ तो मुरदे की पहचान होती है।

ज़िन्दगी जीने के दो तरीके होते है!
पहला: जो पसंद है उसे हासिल करना सीख लो.!
दूसरा: जो हासिल है उसे पसंद करना सीख लो.!

जिंदगी जीना आसान नहीं होता;
बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता.!

जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है;
कभी हंसाती है तो कभी रुलाती है;
पर जो हर हाल में खुश रहते हैं;
जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है।

चेहरे की हँसी से हर गम चुराओ;
बहुत कुछ बोलो पर कुछ ना छुपाओ;
खुद ना रूठो कभी पर सबको मनाओ;
राज़ है ये जिंदगी का बस जीते चले जाओ।

"गुजरी हुई जिंदगी को कभी याद न कर,
तकदीर मे जो लिखा है उसकी फरियाद न कर।
जो होगा वो होकर रहेगा,
तु कलकी फिक्र मे अपनी आज की हँसी बर्बाद न कर।
हंस मरते हुये भी गाता है
और ... मोर नाचते हुये भी रोता है।।

 . .. .  . . . . . . . . . . . . . .  आंतर्जालसे. कविः अज्ञात

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ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नही,
और क्या जुर्म है पता ही नहीं |
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं ।|

ज़िन्दगी, मौत तेरी मंज़िल है,
दूसरा कोई रास्ता ही नहीं ।
सच घटे या बड़े तो सच न रहे,
झूठ की कोई इन्तहा ही नहीं ।|

ज़िन्दगी, अब बता कहाँ जाएँ,
ज़हर बाज़ार में मिला ही नही ।
जिसके कारण फ़साद होते हैं
उसका कोई अता-पता ही नही ।।

धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून,
अब किसी जुर्म की सज़ा ही नही ।
कैसे अवतार कैसे पैग़म्बर,
ऐसा लगता है अब ख़ुदा ही नही ।।

उसका मिल जाना क्या, न मिलना क्या
ख्वाब-दर-ख्वाब कुछ मज़ा ही नही ।
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं ।|

अपनी रचनाओं में वो ज़िन्दा है
‘नूर’ संसार से गया ही नहीं

~कृष्ण बिहारी 'नूर'

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महँगी से महँगी घड़ी पहन कर देख ली,
वक़्त फिर भी मेरे हिसाब से कभी ना चला ...!!"

युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे ..
पता नही था की, 'कीमत चेहरों की होती है...!!'

मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते...!!'